शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

बेटी

आज सुबह का अखबार खोलते ही सबसे पहले मेरी नजर "बेटी बचाओ " के नारे पर पडी़। बेटी शब्द पढते ही लाड, प्यार, ममता, चंचलता,रूठना,मनाना,जि़द्द,रौनक,और जिम्मेदारी जैसी कई भावनाएं अनायास ही मन में कौंध गई। घर में बेटी का होना सम्पूर्णता का  एहसास दिलाता है।आज के युग में जहाँ बेटियां हर उस काम में अपनी योग्यता सिद्ध कर रहीं हैं जहाँ उनके पहुँचने की कल्पना भी कुछ समय पहले असंभव थी ,वहीं आज भी  कुछ  परिवारों में  बेटे की महत्ता का गान हमें कई पीढ़ियां पीछे जाने का  एहसास कराने  लगता है ।
  अपनी  बेटी  से  रिश्ता मानो  आज  से  नहीं बल्कि  खुद  के  बेटी  होने  के  समय से  ही  है । मैंने अपने परिवार  में बेटों  के  बीच  अधिक महत्वपुर्ण व्  मूलयवान होने  का  अहसास बचपन से  ही  किया  है । जिसके  लिए  मैं  आजीवन  माँ  की  अहसानमंद  रहूँगी । शायद  इसीलिए मुझे बच्चों  में लड़कियाँ  अधिक  प्रिय  रहीं  हैं ।  उन्हें  सजाना , सवांरना ,  पढ़ाना ,  गीत  सिखाना और गुडि़या की  तरह  घर भर में  नचाना  मेरा  सबसे  प्रिय  शग़ल  था । बेटियाँ  जितनी  संवेदनशील  होती  हैं ,  बेटे चाह कर भी बराबरी नहीं  कर  सकते ।
                          बेटी  शब्द  एक  जि़म्मेदारी  का  एहसास भी  दिलाता  हैं । चाहे  वह संस्कारों  के  आधार पर हो या  एक  अभिभावक  के  रुप  में  हो । कहा  जाता  है  कि  कन्यादान  सबसे  बड़ा  दान  होता है । यदि आपने यह  दान  लिया  है  तो  इसे  दिए  बिना  आपको  मोक्ष  प्राप्त  नहीं  हो  सकता । इसलिए  आपको  जीवन  में  एक  बार  यह  दान  अवश्य  करना  चाहिए । वहीं  द्दूसरी  ओर  यह  एक  सामाजिक  कर्तव्य  भी  है । इसे  यदि  सही  तरह  से  न  निभाया  जाये तो  भविष्य  में  एक  उच्च  समाज  की  कल्पना  भी  नहीं  की  जा  सकती । जो  बेटी  स्वयं  बोझ  बनकर  पली - बढ़ी  हो , वह  सवयं  कैसे  एक  ऐसे  परिवार  का  निर्माण  कर  सकेगी  जिसका  हर  सदस्य  समाज  व  देश  के  लिए  एक  निर्माता  सिद्ध  हो  सके  बोझ  नहीं।  लाड़ - प्यार  से  पली  बेटि  जो  अपने  माता -पिता  के लिए  गर्व रही  हो  ,वही  आगे  जाकर  एक  शालीन , पढ़े -लिखे , संस्कारी , जिम्मेदार  परिवार  का  निर्माण  कर  सकेगी  जो  एक  नए , स्वच्छ  तथा   उन्नतिपूर्ण  समाज  का  हिस्सा  होगा । उन्हें  बेटों  से  कम  न  आंककर  हम  उन्हें  महत्वपूर्ण  होने  का  एहसास  कराते  हैं  तो  हम  भविश्य  सुधारने  की  नींव  भी  रखते  हैं । इसलिए  मेरी  बेटी  मेरे  जीवन  का  उद्देश्य  भी  है  तथा  ज़िम्मेदारी  भी ।  उसकी  हँसी  से  घर  में रौनक  ही  नहीं  होती , बल्कि   घर  की  उदासी  भी  दूर  होती  है  ।  वह  हमारे  परिवार  का  एक  अनमोल  रत्न  है , जिसके  बिना  यह  घर  अधूरा  है । आशा  है  आप  भी  अपनी  बेटी   के  बारे  में  सोचकर  मेरे  विचारों  से  सहमत  होंगे । एक  सकारात्मक  सोच  तथा  कदम  की  अभिलाषा रखते  हुए  विदा लेती  हूँ , नमस्कार ।

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